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किताबों के साथ बच्चों को बताएं दुनियाबी तौर-तरीके

प्रशिक्षक ने कार्यशाला में शिक्षकों को दिए टिप्स

बांदा, कृपाशंकर दुबे । संत तुलसी पब्लिक स्कूल द्वारा संचालित शुभ संस्कृति किड्स जोन में ‘शिक्षा पर आधारित’ विषय पर आयोजित कार्यशाला में शिक्षकों को बच्चों को किताबी ज्ञान के साथ दुनियाबी ज्ञान देने पर जोर दिया गया। साथ ही बच्चों को तथ्यपरक शिक्षा समय प्रबंधन की जानकारी दी गई। 
महेश्वरी देवी चैराहा स्थित शुभ संस्कृति किड्स जोन में शुक्रवार को शिक्षकों की कार्यशाला आयोजित हुई। शिक्षाविद् व प्रशिक्षक प्रो.गोविंद दास गुप्ता (इलाहाबाद) ने कार्यशाला में उपस्थित शिक्षकों से कहा कि बच्चों को व्यवहारिक ज्ञान देने व ज्ञान के श्रोत तक ले जाने की जरूरत है। जिज्ञासा होना किसी भी ज्ञान का श्रोत होता है।
अतिथि को सम्मानित करतीं अध्यापिकाएं
रूचिपूर्ण शिक्षा का होना बच्चों के लिये बहुत जरूरी है। शिक्षा रूचिपूर्ण नह होने पर बच्चा किसी भी ज्ञान को धारण करने के लिये तैयार नही होगा। समय का प्रबंधन शिक्षक के लिये आवश्यक है। उन्होंने बच्चों में किताबों के साथ दुनियाबी ज्ञान देने की जरूरत बताई। कहा कि जब तक बच्चे दुनिया को नहीं जानेंगे तो शिक्षा के क्षेत्र में आगे नहीं बढ़ेंगे। बच्चों में संस्कार लाना अति आवश्यक है। खुद में गहराई लायें ताकि बच्चों में भी उसी गहराई के साथ ज्ञान की सरलता को प्रस्तुत करें। प्रबन्ध समिति सदस्य व नगर पालिका पूर्व चेयरमैन राज कुमार राज जी ने कहा कि छात्र का दिमाग कच्चे घड़े की तरह होता है। शिक्षक जैसी शिक्षा देंगे वह वही शिक्षा ग्रहण करेगा। विद्यालय अध्यक्ष मीना गुप्ता व उपाध्यक्षा सौदामिनी गुप्ता, शिक्षक रोहित, सृजन मिश्र, रमेश सिंह गौतम तथा मृदुला ने भी इस कार्यशाला को संबोधित किया। प्रबंधक संत कुमार गुप्ता शिक्षक की परिभाषा बताते हुए कहा कि जीवन को सार्थक बनाने के लिये सीखते रहना अति आवश्यक है। शिक्षक का कार्य छात्रों की समस्याओं को हल करना नहीं है बल्कि उन्हें नित नये-नये प्रयोगों के लिये प्रेरित करना है। कार्यक्रम का संचालन शुभ संस्कृति किड्स जोन प्रधानाचार्य अनु सिंह किया। 

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