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एआरपी परीक्षा में सुचिता की उड़ी धज्जियां

शिक्षक परीक्षार्थी मोबाइलों के साथ देते रहे परीक्षा
बीएसए की मनमानी को रोकने में जिला प्रशासन नाकाम

उरई (जालौन), अजय मिश्रा । पिछले दिनों स्थानीय राजकीय इंटर कालेज में आयोजित करायी गयी एआरपी परीक्षा में सुचिता की ऐसी धज्जियां उड़ायी गयी कि शिक्षक परीक्षार्थी अपने जेबों में खुलेआम मोबाइल डाले रहे और वह परीक्षा देते रहे। हैरानी की बात तो यह है कि परीक्षा के दौरान बीएसए सहित अन्य विभागीय अधिकारियों ने कक्षों में पहुंचकर निरीक्षण भी किया लेकिन उन्हें परीक्षार्थियों की जेबों में मोबाइल नजर ही नहीं। लेकिन मीडिया टीम ने अपने तरीके से ऐसे परीक्षार्थियों की फोटो लेने में सफल रहा।

एआरपी परीक्षा में मोबाइल जेब में डाले परीक्षार्थी।

शिक्षा विभाग पर जहां शिक्षा का दारोमदार है वहीं अभी माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की परीक्षा का उत्तरदायित्व भी शिक्षा विभाग पर होगा। परीक्षा की सुचिता बनाये रखने हेतु जहां सरकार व शासन संवेदनशीन है तो वहीं शिक्षा विभाग अपनी कार्यशैली से हमेशा ही चर्चा में बना ही रहता है। अभी हाल ही में शासन के निर्देश पर एआरपी के चयन हेतु जनपद के प्रत्येक विकासखंडों में पांच विषयों की जिसमें हिन्दी, गणित, विज्ञान, अंग्रेजी व सामाजिक विषय का चयन होना था लेकिन शिक्षकों द्वारा रुचि न लेने के कारण इसमें महज 16 शिक्षक ही शामिल हुये जिन्होंने अपने अलग-अलग विषय के माध्यम से प्रार्थना पत्र प्रेषित किये थे। शासन द्वारा दिये गये निर्देशों में स्पष्ट किया गया था कि प्रत्येक विषय की अलग-अलग परीक्षा संपादित होगी तथा परीक्षा के समय मूल्यांकन के समय तथा व्यवहारिक परीक्षा के समय फोटोग्राफी यानी वीडियोग्राफी के द्वारा किया जायेगा। लेकिन इस आदेश को एक तरफ रखकर एक पेपर में ही सभी विषयों के 60 प्रश्न छपवाकर परीक्षा करा दी गयी। वीडियोग्राफी की तो बात ही अलग है। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी राजेश शाही व खंड शिक्षाधिकारी आनंद भूषण परीक्षा का जायजा लेने जीआईसी कालेज के परीक्षा केंद्र में पहुंचे तो परीक्षार्थी अपनी जेबों में मोबाइल रखकर परीक्षा देते मिले। यह परीक्षा की सुचिता का नमूना मात्र है। अब इनके भरोसे माध्यमिक की इतनी बड़ी परीक्षा सुचितापूर्ण तरीके से कैसे संपादित होगी। शासन के निर्देशों में स्पष्ट है कि विषय विशेषज्ञों से कापियों का मूल्यांकन कराया जाये अब प्रश्न पत्र ही विषयवार नहीं हैं तो विषय विशेषज्ञ कैसे एक ही विषय का पांच विषयों का मूल्यांकर कैसे करेंगे। इस एआरपी चयन में जिला विकास अधिकारी अध्यक्ष, डायट एवं बेसिक शिक्षा विभाग को यह दायित्व मिला है फिर भी मनमानी देखने को मिली। इस मामले में जिला प्रशासन क्या कदम उठाता है यह तो समय ही बतायेगा। लेकिन जिस तरह से बीएसए की मनमानी पर जिला प्रशासन के जिम्मेदार अधिकारी अभी तक मौन रहना किसी के गले नहीं उतर रहा है।


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