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राम वनगमन लीला मंचन के दौरान रो पड़े भक्त

दस दिवसीय रामलीला में छठवें दिन दशरथ प्रतिज्ञा, राम वन गमन, केवट संवाद का मंचन 

बांदा, कृपाशंकर दुबे । नरैनी कस्बे से सटे हुए पनगरा गांव स्थित आयुष ग्राम दिव्य चिकित्सा भवन के संस्थापक डा.मदनगोपाल बाजपेई के संयोजन में चल रही दस दिवसीय रामलीला के छठवें दिन मप्र के रींवा खजूरीताल स्थित देश की ख्यातिलब्ध आदर्श रामलीला मंडली के कलाकारों ने दशरथ प्रतिज्ञा, राम वनगमन, केवट संवाद व चित्रकूटधाम को अपनी तपोस्थली बनाने की लीला का सजीव मंचन किया। 
रविवार की रात छठवें दिन की रामलीला में कलाकारों ने दशरथ प्रतिज्ञा का मंचन करते हुए दिखाया कि जब राजा दशरथ राम सहित अपने सभी पुत्रों का विवाह संपन्न कराकर वापस लौटे और एक दिन अपने राजदरबार में बैठे थे, तभी उन्हें कान के पास अपना सफेद बाल दिखा और उन्होंने राम को अपना युवराज बनाने का ऐलान
अयोध्या से वन को जाते राम, सीता व लक्ष्मण।
कर दिया। उधर अयोध्या की रानी कैकेयी की दासी मंथरा ने रानी को उकसाया और रानी कैकेयी ने दो वरदान के रूप में अपने पुत्र भरत को राजगद्दी व राम को चैदह वर्ष का वनवास मांग लिया। कैकेयी के वचन सुनते ही राजा दशरथ अचेत हो गए, लेकिन राम ने माता की इच्छा व पिता के वचन की रक्षा के लिए सहर्ष वन जाने का निर्णय लिया। भाई के प्रेम से बंधे लक्ष्मण व देवी सीता भी वन के लिए निकल पड़े। राम के साथ अयोध्या की पूरी प्रजा भी रोते बिलखते हुए वन के लिए चल पड़ी, लेकिन राम, लक्ष्मण व सीता मंत्री सुमंत के साथ प्रजा को सोता छोड़कर वन के रास्ते पर आगे बढ़ गए। बाद में नदी पार करते समय केवट से मार्मिक संवाद की लीला का कलाकारों ने सजीव मंचन किया। नदी पार करके राम, लक्ष्मण व सीता ने चित्रकूटधाम के गहन वनों में पर्णकुटी बनाकर वनवास का अधिकतम समय व्यतीत किया और चित्रकूट की धरा को पावन पवित्र बनाया। वहीं परिसर में ही आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के दौरान कथावाचक पूर्व प्रचार्य माताप्रसाद शुक्ल ने कथा सुनाते हुए समुद्र मंथन, भगवान धन्वन्तरि प्राकट्य व लक्ष्मी जी के प्रादुर्भाव की कथा सुनाई। रामलीला के दर्शकों में डा.परमानंद बाजपेई, डा.अर्चना बाजपेई, उमाचरण बाजपेई, विष्णुकांत त्रिपाठी, श्यामप्रकाश शुक्ला, राजेंद्र द्विवेदी ओरन, सीताशरण यादव, राकेश प्रताप सिंह, गिरिराज दीक्षित, शिवधनी पांडेय, प्रेमप्रकाश मिश्रा, राकेश द्विवेदी, अनंतराम त्रिपाठी, डा.अवधबिहारी द्विवेदी समेत आयुष ग्राम के तमाम लोग मौजूद रहे। 

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