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ग्राम ओडीएफ, खुले में शौंच जाते हैं ग्रामीण

चित्रकूट, सुखेन्द्र अग्रहरि। 2 अक्टूबर सरकार के लिए खास दिन रहा, लेकिन यह खास गांधी जयंती के लिए नहीं था। बल्कि सरकार के स्वच्छ भारत अभियान के चार साल पूरे होने पर इसकी सफलता का मूल्यांकन के कारण है। देश को स्वच्छता की ओर बढ़ावा देने के लिए बनी इस योजना में हर घर में शौचालय होने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। शौच मुक्त भारत करने के लिए पैसा भी पानी की तरह बहाया जा रहा है। जिसके लिए जोर लगाकर लोगों की जेब से पैसा निकाला गया पर अभियान की जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां करती है। इस योजना के तहत गांव में कई हजार शौचालयों का निर्माण कागजों में हुआ, क्योंकि गांव में लोग अभी भी शौचालय
का प्रयोग नहीं कर रहे हैं। ऐसा ही हाल गांव उमरी भैरमपुर, खिचरी एवं टिकरिया जमुनिहाई विकासखंड मानिकपुर का है। इस अभियान को सफल दिखाने के लिए गांवों को ओडियफ घोषित कर दिया है, परंतु इन गांवों में कई लोग आज भी शौच के लिए खुले में जाते हैं। स्वच्छ भारत अभियान को सफल बनाने के लिए लीपापोती खूब हुई है। दूसरा सबसे बड़ा कारण शौचालय का प्रयोग करने में आता है पानी की कमी। जहां एक तरफ पाठा पानी की किल्लत से जूझ रहा है वही शौचालयो की सफाई मे अत्यधिक पानी लगता है। जहा एक तरफ लोग पानी की पूर्ति के लिए कई किलो मीटर की दूरी तय करते हैं। इस अभियान की सफलता तो देखिए शौचालय बने हैं पर प्रयोग के नहीं, क्योंकि अभी भी आधे  अधूरे ही शौचालय निर्माण हुआ है तो कभी खराब सामान लगाने मे सचिव एवं प्रधान ने कोई कोर कसर नही छोडी। इसलिए ज्यादा दिन तक नहीं चल पाते। स्कूलों में शौचालय का निर्माण तो बहुत तेजी से हुआ है, लेकिन शौचालयों की सफाई पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है।

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