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मोस्ट जागृति संस्थान ने निकाली झलकारी बाई शोभायात्रा

शोभा यात्रा में ढोल नगाडों पर थिरकीं महिलाएं 

बांदा, कृपाशंकर दुबे । रविवार को संविधान दिवस और वीरांगना झलकारी बाई जयंती पर मोस्ट जागृति संस्थान के लोगों ने शोभायात्रा निकाली। शोभायात्रा में झलकारी बाई की झांकी आकर्षण का केंद्र रही। ढोल नगाड़ों की धुन पर शोभायात्रा में शामिल महिलाएं जमकर थिरकीं। इस दौरान समाज के लोगों से एकजुट होने का आवाहन किया गया। 

झलकारी बाई की शोभा यात्रा निकालते मोस्ट जागृति संस्थान के लोग।
मोस्ट युवा जागृति संस्थान के तत्वाधान में रविवार को संविधान दिवस और वीरांगन झलकारी बाई की जयंती धूमधाम से मनाई गई। सुबह अंबेडकर पार्क से भव्य शोभा यात्रा निकाली गई। शोभा यात्रा शहर के प्रमुख मार्गों से होकर निकली। रथ और घोड़े पर सवार झलकारी बाई की झांकियां आकर्षण का केंद्र रहीं। यात्रा में शामिल महिलाएं ढोल-नगाड़ों पर जमकर नारे थिरके। नगर भ्रमण के बाद शोभा यात्रा जीआईसी मैदान में पहुंच कर जनसभा के रूप में तब्दील हो गई। जनसभा को संबोधित करते हुए कमला नेहरू इंजीनियरिंग कालेज के प्रो.स्वयंप्रकाश कुटार व लखनऊ विश्वविद्यालय के प्रो.रविचंद्रन ने कहा कि खंड-खंड में जातियों में समाज बंटा है। इसे एकजुट करना आवश्यक है। संस्थापक अध्यक्ष कैलाश बौद्ध ने कहा कि भारत जातियों का देश है। यहां जातियां ही समाज हैं। छह हजार से अधिक जातियों में देश बंटा होने के कारण यहां के लोग अपने अधिकार नहीं मिल पा रहे हैं। आजादी के 72 साल गुजरने के बाद भी समाज गरीबी और भुखमरी से जूझ रहा है। दलित, पिछड़ा, आदिवासी और मुस्लिमों को एकजुट होने का आह्वान किया। जनसभा को हृदयेश कुमार वर्मा, योगेंद्र प्रताप सिंह, घनश्याम कोरी, अंबरीश, जयनारायण श्रीवास, नरेंद्र कुमार, रामविशाल, रामपाल प्रजापति, राममिलन सिंह पटेल, केपी कोरी, पवन देवी कोरी आदि ने संबोधित किया। इस मौके पर जिलाध्यक्ष अमितेंद्र कुमार कोरी, सुरेश विश्वकर्मा, मोहनलाल, विनोद सोनकर, कालीचरण, राघवेंद्र कुमार, कपूर प्रसाद कोरी, कमलेश कोरी, मीरा सिंह, नाहर, पूनम कुटार आदि उपस्थित रहे। 

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