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कार्यवाही न होने पर आयोग को भेजे पत्र: अध्यक्ष

38वें बेंच की खण्ड पीड में आए 304 मामले
15 दिन में समस्या निदान के दिए निर्देश

चित्रकूट, सुखेन्द्र अग्रहरि। राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग के अध्यक्ष प्रियांक कानूनगो, सदस्य उत्तर प्रदेश राज्य बाल संरक्षण आयोग डा साक्षी बैजल व सदस्य राज्य महिला आयोग नीता साहू की उपस्थिति में राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग की खण्ड पीठ व जिला प्रशासन के द्वारा बाल अधिकारों के उल्लघंन से संबंधित प्रकरणों के निस्तारण को शिविर का आयोजन मंदाकिनी गेस्ट हाउस में हुआ।
अध्यक्ष ने कहा कि भारत सरकार के नीति आयोग में पूरे देश के 115 जिलों को अकांक्षा जिले घोषित किये गये है जो विकास के मामलों पर अति पिछड़े हैं। जिसमें चित्रकूट भी है। इन जिलों में 30 प्रतिशत शिक्षा, 30 प्रतिशत स्वास्थ्य व 10 प्रतिशत अन्य सुविधाओं पर कुल 70 प्रतिशत पिडछ़े होने पर आयोग निगरानी कर रहा है। इन सभी जिलों में जिला प्रशासन के समक्ष समस्याओं को चिन्हित कर निस्तारण कराया जा रहा है। ताकि जनपद के अंतिम पायदान पर खड़े बच्चों को लाभ दिलाया जा सके। आयोग का नैतिक दायित्व है कि बच्चों को कैसे न्याय मिले। जनपद में 21 राज्यों में 38वीं बेंच का आयोजन किया गया। जिसमें जिला प्रशासन का अच्छा सहयोग रहा। अध्यक्ष ने 150 समस्याओं को सुना। जिसमें अधिकतर दिव्यांग बच्चों की समस्याएं रही हैं। इसके अलावा विधवा पेंशन तथा विकलांग प्रमाण पत्र, प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना, बच्चों के माता पिता न होने पर उनको आर्थिक सहायता, इलाज की जरूरत आदि मामले रहे। उन्होंने बाल संरक्षण अधिकारी व श्रम प्रवर्तन अधिकारी को निर्देश दिये कि जो भी बच्चा बाल श्रम जिस संस्था और दुकान में कर रहा है ऐसे मामलों को संज्ञान में लेते हुए संबंधित के खिलाफ कार्यवाही करायी जाये। टीम ने स्कूलों का भी निरीक्षण किया है। जहां पर जो कमियां मिली हैं उन पर कार्यवाही करते हुए रिर्पोट मांगी गई है। बाल सुधार गृह का भी निरीक्षण किया गया। जहां पर बच्चों के रहने की व्यवस्था का स्थान ठीक नहीं है। इस पर संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए है कि एक माह के अंदर अन्य जगह शिफ्ट कराया जाये। अपर जिलाधिकारी जीपी सिंह को निर्देश दिये कि जिन बच्चों के माता, पिता नहीं
 
हैं उनका निरीक्षण 15 दिन के अंदर अधिकारियों से कराकर कृत कार्यवाही से अवगत करायें। जिला प्रोबेशन अधिकारी को निर्देश दिये कि प्रत्येक विकास खण्डों में विधवा पेंशन के कैम्प लगाकर जो समस्याएं हो उनका निस्तारण करें। मुख्य चिकित्साधिकारी से कहा कि आरबीएसके की टीम को लगाकर बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण कराया जाये। उसमें जो बीमारी मिले तत्काल उनका उपचार हो। उन्होंने सभी समस्याग्रस्त लोगों से कहा कि अगर 15 दिन में कोई कार्यवाही नहीं होती हे तो पंजीकरण पत्र में आयोग को अवगत करायें। इस खण्डपीठ में 304 मामले आये। जिसमें संबंधित विभागों को कार्यवाही करने के निर्देश दिये गये हैं तथा रिर्पोट भी आयोग को उपलब्ध करायें। मौके पर 36 दिव्यांग प्रमाण पत्र जारी किये गये तथा दो बच्चों को व्हील चेयर व एक दिव्यांग को स्मार्ट केन भी दिया गया। 
जिलाधिकारी शेषमणि पाण्डेय ने अध्यक्ष सहित सदस्यों का आभार व्यक्त करते हुए संबंधित अधिकारियों से कहा कि आयोग ने जो दिशा निर्देश दिये गये हैं उनका अनुपालन कराते हुए कृत कार्यवाही से आयोग को अवगत करायें। इस अवसर पुलिस अधीक्षक अंकित मित्तल, राष्ट्रीय बाल संरक्षण आयोग के एआरओ. राकेश प्रजापति, भावना शर्मा, शक्ति सिंह, सीएमओ डा विनोद कुमार, एएसपी बलवंत चैधरी, डीडीओ आरके त्रिपाठी, डीपीआरओ राज बहादुर, जिला प्रोबेशन अधिकारी रामबाबू विश्वकर्मा, जिला कार्यक्रम अधिकरी मनोज कुमार, दिव्यांग जन अधिकारी राजेश नायक सहित संबंधित अधिकारी, संस्थाओं के प्रतिनिधि तथा समस्याग्रस्त बच्चे व अभिभावक मौजूद रहे।

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