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गर्भनाल की बेहतर देखभाल रखती नवजात को सुरक्षित

गर्भनाल देखभाल के आभाव से संक्रमण फैलने का अधिक खतरा 
नवजात की गर्भनाल में कभी न लगाएँ तेल या क्रीम 
संक्रमित गर्भनाल से नवजात के लीवर को पहुच सकता है नुकसान, जा सकती है जान भी 

बांदा, कृपाशंकर दुबे । मां और गर्भस्थ शिशु को गर्भनाल भावनात्मक एवं शारीरिक दोनों स्तर पर जोड़ता है। मां के गर्भ के अन्दर शिशु को गर्भनाल के जरिए ही आहार और ऑक्सीजन भी प्राप्त होती है। इसलिए शिशु जन्म के बाद भी गर्भनाल के बेहतर देखभाल की जरूरत होती है। बेहतर देखभाल के आभाव में नाल में संक्रमण फैलने


का खतरा बढ़ जाता है, जो गंभीर परिस्थितियों में नवजात के लिए मृत्यु का भी कारण बन जाता है।
प्रजनन एवं बाल स्वास्थ्य के नोडल अधिकारी डॉ. आर के सचान बताते हैं कि गर्भनाल की समुचित देखभाल जरूरी होती है। शिशु जन्म के बाद नाल को काट दिया जाता है जिससे कुछ समय तक यह एक खुले घाव की तरह होता है। हांलाकि कुछ समय बाद यह सूखकर अपने आप शिशु के शरीर से अलग हो जाता है पर तब तक इसका ख्याल रखना और संक्रमण से बचाना बेहद आवश्यक होता है। नाल के ऊपर किसी भी प्रकार के तरल पदार्थ, तेल या क्रीम का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। जितना हो सके नाल को सूखा रखें। बाहरी चीजों के इस्तेमाल से संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। कुछ परिस्थियों में संक्रमण का पता 1 से 2 वर्ष बीत जाने पर लगता है, ऐसे में बच्चे को लीवर सम्बन्धी गंभीर बीमारियाँ भी हो सकती हैं।  इस संबंध में फैसिलिटी स्तर से लेकर समुदाय स्तर तक लोगों को जागरुक भी किया जाता है। स्वास्थ्य इकाइयों पर स्टाफ नर्स गर्भनाल की देखभाल के बारे में बताती हैं जबकि समुदाय स्तर पर आशाएँ लोगों को जागरुक करने में अहम योगदान दे रही हैं। इसके लिए इन्हें गर्भनाल देखभाल का प्रशिक्षण भी दिया गया है। 

गर्भनाल देखभाल इसलिए जरूरी

बांदा। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार पहले एक माह में नवजात मृत्यु की संभावना एक माह के बाद होने वाले मौतों से 15 गुना अधिक होती है। पांच साल से अंदर बच्चों की लगभग 82 लाख मौतों में 33 लाख मौतें जन्म के पहले महीने में ही होती है। जिसमें 30 लाख मृत्यु पहले सप्ताह एवं 2 लाख मृत्यु जन्म के ही दिन हो जाती हैं। जन्म के शुरुआती सात दिनों में होने वाली नवजात मृत्यु में गर्भनाल संक्रमण भी एक प्रमुख कारण होता है। 

ऐसे रखें गर्भनाल का ध्यान

बांदा। प्रशिक्षित चिकित्सक द्वारा प्रसवोपरांत नाल को बच्चे और मां के बीच दोनों तरफ से नाभि से 2 से 4 इंच की दूरी रखकर काटी जाती है। बच्चे के जन्म के बाद इस नाल को प्राकृतिक रूप से सूखने देना जरूरी है, जिसमें 5 से 10 दिन लग सकते हैं। शिशु को बचाने के लिए नाल को हमेशा सुरक्षित और साफ रखना आवश्यक है ताकि संभावित संक्रमण को रोका जा सके।

- गर्भ नाल की सफाई करते वक्त उसे हमेशा सूखा रखें ताकि संक्रमण से बचाया जा सके 
- नाल के ऊपर कुछ भी बाहर से नहीं लागएं
- नाल की सफाई से पहले हाथ अच्छी तरह से साबुन से धोकर सुखा ले ताकि संक्रमण नहीं फैले
- शिशु के मल दृ मूत्र साफ करते समय ध्यान रखें की नाल के संपर्क से अलग रखें 
- नाल की सफाई के लिए केमिकल का इस्तेमाल नहीं करें वरन साफ रुई या सूती कपड़ा का इस्तेमाल करें
- नाल को ढँक कर रखने से पसीने या गर्मी से संक्रमण फैल सकता है इसलिए उसे खुला रखे ताकि वह जल्दी सूखे
- कार्ड स्टम्प को कुदरती रूप से सूख कर गिरने दें जबर्दस्ती न हटाएं 
- नाल के सूख कर गिर जाने तक शिशु को नहलाने के जगह स्पंज दें

 ये लक्षण दिखें तो नवजात को तुरंत अस्पताल ले जाएँ  
- नाल के आसपास की त्वचा में सूजन या लाल हो जाना 
- नाल से खून का बहाव न रुकना 
- नाल से दुर्गंधयुक्त द्रव का बहाव होना 
- शिशु के शरीर का तापमान असामान्य होना
- नाल के पास हाथ लगाने से शिशु का दर्द से रोना

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