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सेतु निर्माण इकाई की धींगामुश्ती की भेंट चढ़ा कोटरा सेतु निर्माण

दिसंबर 2011 में शुरू हुआ था निर्माण
मार्च 2015 में होना था निर्माण कार्य पूरा

कोटरा (जालौन), अजय मिश्रा । उप्र राज्य सेतु निगम लि. की इकाई सेतु निर्माण इकाई उरई-जालौन द्वारा वर्ष 2011 दिसंबर माह में बेतवा नदी सेतु कोटरा का निर्माण कार्य शुरू कराया गया था। जिसे मार्च 2015 में पूरा होना था। लेकिन कार्यदायी संस्था नौ वर्षों में भी उक्त सेतु का निर्माण पूरा नहीं करा पायी। चूंकि उक्त सेतु का निर्माण राज्य योजना के तहत होना था लिहाजा अनेकों बार जिला मुख्यालय में करोड़ों रुपये से पूर्ण होने वाली अधूरी परियोजनाओं की समीक्षा होने के बाद भी उक्त कार्य में हद दर्जे की लापरवाही से उसका लाभ जनपद जालौन व झांसी जनपद के लोगों को नहीं मिल पा रहा है।

उल्लेखनीय हो कि वर्ष 2011 में प्रदेश सरकार द्वारा बेतवा नदी सेतु कोटरा घाट पर पुल निर्माण की स्वीकृत देने के साथ ही पुल निर्माण हेतु 3583.24 लाख रुपये का बजट भी स्वीकृत किया था ताकि उक्त पुल का निर्माण निर्धारित अवधि मार्च 2015 में पूर्ण हो सके और फिर उसका लाभ जनपद झांसी व जालौन के लोगों को मिल सके। लेकिन प्रदेश सरकार की मंशा को पलीता लगाने में माहिर कार्यदायी संस्था उप्र राज्य सेतु निगम लि. अपनी धींगामुश्ती के चलते आठ वर्षों में भी उक्त पुल का निर्माण पूरा नहीं करा पायी। आज भी उक्त पुल पर चार खंडों का लेण्टर अधूरा ही पड़ा है। जिसे पूरा करने की सुध न तो कार्यदायी संस्था है और न ही इस संबंध में जिले के जनप्रतिनिधि कोई रुचि दिखा रहे हैं। ताज्जुब की बात तो यह है कि जिला मुख्यालय में प्रदेश सरकार को दो नुमाइंदे जो जनपद के प्रभारी बनाये जाते है जिसमें एक शासन व दूसरा प्रशासन का होता है। वह भी करोड़ों रुपयों की लागत से अधूरी परियोजनाओं का फीडबैक तो लेते हैं लेकिन उक्त अधूरा कार्य कब पूरा होगा इसका जबाब उनके पास नहीं होता है। यही कारण है कि जनपद में करोड़ों रुपयों की लागत से अधूरी परियोजनायें आज भी आधी अधूरी पड़ी हुयी है और उसका लाभ जनता को नहीं मिल पा रहा है।

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