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Wednesday, November 27, 2019

वाणिज्य कर विभाग आपके द्वार, कराए ५१ पंजीकरण

बिजनौर (संजय सक्सेना)  वाणिज्य कर विभाग आपके द्वार योजना के अंतर्गत विभागीय अधिकारियों ने स्योहारा क्षेत्र में भ्रमण कर पंजीकरण लेने के लिए व्यापारियों को जागरूक किया। वाणिज्य कर धामपुर सहायक आयुक्त अनमोल कपूर ने बताया कि एक जुलाई 2017 को वैट के स्थान पर जीएसटी लागू हुआ था। मुख्यमंत्री ने विगत सप्ताह सम्पूर्ण वाणिज्यकर विभाग में प्रदेश की जनसंख्या के अनुपात में पंजीकृत व्यापारियों की कम संख्या पर खेद व्यक्त किया था। सरकार द्वारा व्यापारियों के कल्याण एवं सुविधाओं का शुभारंभ किया गया है। पंजीकृत व्यापारियों के लिए बीमा राशि पांच लाख से बढ़ाकर दस लाख


कर दी गयी है वह भी बिना किसी प्रीमियम के। व्यापारियों को पेंशन योजना सुविधा लागू की गई है। पंजीकृत व्यापारियों को प्रदेश के बाहर से सामान मंगाने की सुविधा दी गयी है। जिनका डेढ़ करोड़ या अधिक का व्यापार है, उनके के लिए कम्पोजिशन समाधान योजना एक मुश्त कर प्रणाली तीन माह में एक बार की गई है। नई जीएसटी रिटर्न फाईलिंग व्यवस्था लागू की जा रही है। सरकार की मंशा है कि व्यापारी अधिक से अधिक पंजीकरण लेकर लाभ उठाएं। व्यापारियों में जागरूकता लाने के लिए वाणिज्यकर विभाग आपके द्वार योजना चलाई जा रही है। इसके अंतर्गत नगर तथा ग्रामीण क्षेत्र में भ्रमण कर पंजीकरण लेने का कार्य किया जा रहा है। इस भ्रमण में 51 व्यापारियों को जागरूक कर पंजीकरण लिए गए। वाणिज्यकर अधिकारी देवेंद्र पाठक, व्यापारी नेता अरुण कुमार वर्मा आदि मौजूद रहे।

कुछ कमियां भी हैं- अरुण कुमार वर्मा
इस मौके पर व्यापारी नेता अरुण कुमार वर्मा ने कहा हम व्यापारी बीमा योजना का खुले दिल से स्वागत करते हैं परंतु शासन छोटे और ग्रामीण क्षेत्र के व्यापारियों पर ज़बरदस्ती जो रजिस्ट्रेशन फॉर्म भरने का कार्य कर रहा है हम उसका विरोध करते हैं
साथ ही जीएसटी में छूट की सीमा 40 लाख से बढ़ाकर 80 लाख की जानी चाहिए ओर जीएसटी का जो नक्शा जो हर माह जाता है उसको क्वार्टरली किया जाना चाहिए सरकार बिना वजह ही गरीब और ग्रामीण क्षेत्र के व्यापारियों को दिन प्रतिदिन परेशान करने पर लगी हुई है जिस कारण से व्यापारी वर्ग गरीबी रेखा से नीचे जिंदगी गुजारने को मजबूर है मेरा सरकार से अनुरोध है सरकार व्यापारियों पर यह जुल्म ना करें ऐसा करने पर इंस्पेक्टर राज को बढ़ावा मिलेगा जो कि ना देश हित में है ना व्यापार हित में है।


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