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पहली महिला सेना का गठन किया था रानीलक्ष्मी बाई ने

हमीरपुर, महेश अवस्थी । प्रधानाचार्य डा.भवानीदीन ने कहा कि लक्ष्मीबाई सही माइने में सत्तावनी समर की महान जुझारू, संघर्षशील महिला थीं। देश को जंगे आजादी में रानी लक्ष्मीबाई के योगदान को भुलाया नहीं जा सकता। आजादी आंदोलन लक्ष्मीबाई की हुंकार आज भी बिट्रीश दस्तावेजों में दर्ज है जो तीन दशकों तक जीवन


देश के लिये उन्होंने समर्पित किया था। उनका जीवन इस बात का साक्षी है कि संकल्प का कोई विकल्प नहीं होता। दृढ़ता से लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है। 29 वर्षों का रानी लक्ष्मीबाई का जीवन जीवटता के ज्वार से पूरित रहा। उन्होंने अपनी झांसी नहीं दूंगी का नारा दिया। उसके लिये दृढ़ता भी दिखायी। देश की पहली स्त्री सेना का उन्होंने गठन किया। उनकी दूरदर्शी सोच को देश ने अपना कर हर क्षेत्र में महिला सहभागिता को बढ़ाया है। कार्यक्रम में अखिलेश सोनी, प्रदीप यादव, राजकिशोर पाल, गनेश शिवहरे ने विचार रखे। 

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