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हर नागरिक को संविधान का अध्ययन जरूर करना चाहिए- डॉ रितेश

उरई(जालौन), अजय मिश्रा । ऑल आरक्षित टीचर्स वेलफेयर एसोसिएशन, धम्मभूमि व साथी संगठनों द्वारा संविधान दिवस पर एक संगोष्ठी डॉ (प्रो०)धर्मेंद्र कुमार के नवीन आवास उमरारखेरा में आयोजित की गयी।संगोष्ठी की अध्यक्षता वरिष्ठ बहुजन चिंतक डॉ रामाधीन अहिरवार ने की व संचालन सुंदरसिंह शास्त्री  किया।
’कार्यक्रम का मंगलारम्भ संविधान निर्माता बाबा साहब की प्रतिमा पर दीप प्रज्ज्वलन व माल्यार्पण-पुष्पार्चन से हुआ।’संगोष्ठी में गांधी महाविद्यालय के प्रोफेसर डॉ रितेश कुमार वर्मा ने संविधान प्रदत्त मौलिक अधिकारों,कर्तव्यों व उसकी प्रस्तावना पर विस्तार से प्रकाश डाला उन्होंने कहा कि भारत की हर समस्या का समाधान संविधान में दिया गया है।इसलिए भारत के हर नागरिक को संविधान का अध्ययन जरूर करना चाहिए एवं संविधान की एक प्रति अपने पास रखनी चाहिए। के के शिरोमणि,मिस्टरसिंह,सुनीलदत्त चैधरी,सुरेंद्र गौतम ने संयुक्त रूप से कहा कि भारत’के संविधान की बदौलत ही’ ’अनुसूचित,आदिवासी,पिछड़े’हक बंचित समाज का मान-सम्मान व स्वाभिमान कायम व कायम है संविधान प्रदत्त अधिकारों के प्रयोग से उक्त वर्ग आगे बढ़ रहे है संविधान विरोधों सरकारें उनके हकों पर कटौती करने पर आमादा हैं। रामसनेही बाबू, डॉ देवेंद्र कुमार,श्यामविहारी आदि ने संविधान प्रदत्त अधिकारों के हनन पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि आज निजीकरण के द्वारा आरक्षण को खत्म किया जा रहा है।

शैलेन्द्र शिरोमणि व प्रभा बौद्ध ने कहा कि बाबा साहब ने संविधान में महिलाओं को बराबरी का अधिकार दिया जिससे वे आज तरक्की के हर क्षेत्र में आगे बढ़ रहीं हैं संविधान लागू होने के पहले महिलाओं को उपभोग की वस्तु समझ जाता था।
डॉ धर्मेन्द्र ने बताया कि बाबा साहब अम्बेडकर ने संविधान सभा के अंतिम भाषण 25 नवम्बर 1949 को कहा था कि किसी देश का संविधान कितना भी अच्छा हो वह साबित नहीं हो सकता जबतक संविधान को चलाने वालों की मंशा अच्छी न हो।इसी प्रकार संविधान कितना भी खराब हो वह अच्छा साबित हो सकता है यदि संविधान चलाने वालों की मंशा अच्छी हो।
अध्यक्षता कर रहे वरिष्ठ बहुजन चिंतक डॉ रामाधीन ने कहा वर्तमान राजनैतिक आरक्षण, आरक्षित वर्गों के विकास के लिए अभिशाप है।आरक्षित सीटों से चुनकर आये जनप्रतिनिधि आरक्षित वर्गों के प्रति उत्तरदायी न हो होकर अपने दल के प्रति उत्तरदायी रहते है।इसलिए उक्त आरक्षण के औचित्य व आवश्यकता पर बाबा साहब ने ही प्रथम आम चुनाव के बाद प्रश्न चिन्ह लगा दिया था। गोष्ठी में मुख्यरूप से  वीरेंद्र बौद्ध,सुनील गौतम,शैलेश दमरास,आदर्श जैसारी,बृन्दावन अहिरवार,ब्रजेश गौतम,प्रेमकुमार कुशवाहा,श्यामजी पाल,मानसिंह दोहरे आदि सहित मोहल्ले कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

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