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जमीन छोड़ने की नोटिस मिलने से मजदूरों के उड़े होश

तहसीलदार को सौपे पत्र में लेखपाल पर लगाए आरोप

चित्रकूट, सुखेन्द्र अग्रहरि। विगत कई वर्षों से झुग्गी झोपड़ी बनाकर मजदूरी करने वाले मजदूरों को जमीन खाली करने की नोटिस मिली तो होश उड़ गए। ऐसे में मजदूरों ने ह्युमन राइट्स लाॅ नेटवर्क के सदस्य की अगुवाई में तहसीलदार को पत्र सौप घर उजाडने से रोकने की गुहार लगाई है।

शनिवार को अधिवक्ता रुद्रप्रसाद मिश्रा की अगुवाई में भरतकूप मौजा अकबरपुर के आदिवासी मजदूरों ने तहसीलदार को सौपे पत्र में कहा कि क्रेशर व पहाड़ों में मजदूरी करते हैं। जीविकोपाज्रन का एकमात्र सहारा है। गाटा संख्या 825 में झोपडी बनाकर गुजारा कर रहे हैं। बच्चों को पढ़ने के लिए विद्यालय बनाया है। कोआपरेटिव भी है। वहीं पर तत्कालीन प्रधान व लेखपाल ने जमीन आवंटित की थी। जिस पर घर बनाए हैं, लेकिन वर्तमान लेखपाल परेशान करने की मंशा से बेदखली व जुर्माना को अवैध कब्जा की नोटिस तहसील के माध्यम से भेजी है। जबकि 2005 के पूर्व से घर बने हैं। बताया कि तब से अभी तक कई डीएम विद्यालय आ चुके हैं। कभी किसी प्रकार की कब्जे की नोटिस नहीं दी गई। कहा कि अगर उन्हें बेदखल कर दिया गया तो वह लोग बेघर हो जाएगें। उन्होंने मांग किया कि भेजी गई नोटिस को वापस लेते हुए घर उजड़ने से बचाया जाए। इस मौके पर रणवीर सिंह, शिवकुमार, सुनीता, विजय, दशरथ, देवराज, इन्द्ररनिया, बुद्धविलास आदि मौजूद रहे।

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