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मछुआरा समुदाय ने केन्द्रीय राज्यमंत्री को सौंपा ज्ञापन

फतेहपुर, शमशाद खान । ठेकेदार की घटतौली व जबरिया मछली ले जाने से पीड़ित मछुआरा समुदाय के लोगों ने जिले की सांसद एवं केन्द्रीय राज्यमंत्री साध्वी निरंजन ज्योति को सात सूत्रीय ज्ञापन सौंपकर सभी मांगों का जल्द निस्तारण कराये जाने की आवाज उठायी। कहा कि पूर्व में कई बार ज्ञापन दिया जा चुका है लेकिन आज तक कोई कार्रवाई नहीं हुयी। केन्द्रीय राज्यमंत्री ने मछुआरा समुदाय को आश्वस्त किया कि उनकी मांगों पर विचार करके निस्तारण का प्रयास किया जायेगा। 
प्रदर्शन करते मछुआरा समुदाय के लोग।  
मछुआरा कल्याण समिति के अध्यक्ष रामनरेश निषाद की अगुवई में पदाधिकारी लोक निर्माण विभाग के निरीक्षण भवन पहुंचे। जहां केन्द्रीय राज्यमंत्री साध्वी निरंजन ज्योति को सात सूत्रीय मांगों का ज्ञापन सौंपा। जिसमें कहा गया कि महावतपुर असहट, मड़ौली, मझिगवां, गुरवल, महोली, बिकौरा, एकडला, अहमदगंज तिहार, नरौली, मड़ैया, बरियाछ, झुरहापुर, टिकुरा, चंदापुर, कोट थाना किशनपुर व ग्राम जरौली, कौहन, मिर्जापुर, लक्ष्मणपुर, रमसोलेपुर, सरकण्डी थाना असोथर व यमुना नदी के किनारे बसे अन्य मछुवारा निषाद केवट जिनका मुख्य व्यवसाय नाव द्वारा यमुना नदी में मछली पकड़ना है। यमुना नदी में क्षेत्रवार पानी की नीलामी ठेकेदारों को कर दी जाती है। ठेकेदार अपने गुण्डों द्वारा समुदाय के लोगों से चार रूपये प्रति किलो से अधिकतम बीस रूपये प्रति किलो जबरिया मछली ले लेते हैं। दस किलो मछली में तीन किलो बट्टा काटकर सात किलो मछली का ही दाम दिया जाता है। मछली में जमकर घटतौली की जाती है। शिकायत करने पर पुलिस प्रशासन व ठेकेदारों द्वारा उत्पीड़न की कार्रवाई की जाती है। बताया कि कई बार मांगों का ज्ञापन जिलाधिकारी, उप जिलाधिकारी को दिया गया। लेकिन आज तक मांगे पूरी नहीं की गयी। मांग किया कि नदियों का ठेका खत्म करके सरकारी कांटा लगाकर उचित दामों पर मछलियों की खरीद की जाये, मछुआरा का परिचय पत्र बनाकर उनका व उनकी बोट का सीमा सरकारी तौर पर किया जाये, नदियों के किनारे प्राथमिकता के आधार पर मछुवारों को खेती करने का विधिक अधिकार दिया जाये, अत्याचार व उत्पीड़न से बचाने के लिए सामाजिक सुरक्षा दी जाये, नदियों के किनारे सभी प्रकार की जल, जमीन, जंगल में मछुआरों को मालिकाना हक दिया जाये, झोपड़ पट्टी में रहने की दशा को देखते हुए उन्हें आवास दिये जायें। इस मौके पर संरक्षक पूरनलाल, देवसत्य निषाद, रतिभान निषाद, ज्ञानचन्द्र, अर्जुन, शोभा, लाला, रामराज, रघुवर निषाद, गोकुल, बचोली, रामनारायन सहित तमाम मछुवारा समुदाय के लोग मौजूद रहे। 

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