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महारानी लक्ष्मीबाई के कृतित्व एवं व्यक्तित्व पर डाला गया प्रकाश

अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा ने जन्मदिवस पर आयोजित की विचार गोष्ठी

बांदा, कृपाशंकर दुबे । अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा द्वारा विवेक सिंह कछवाह प्रान्तीय कार्यवाहक अध्यक्ष युवा के निज निवास बंगालीपुरा में महान बीरांगना अमर स्वतंत्रता सेनानी महारानी लक्ष्मीबाई के जन्म दिवस पर एक विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। गोष्ठी की अध्यक्षता राम सिंह कछवाह एवं संचालन रमजोर सिंह चंदेल द्वारा किया गया।

चित्र पर माल्यार्पण करते अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा के पदाधिकारी 
गोष्ठी का प्रारम्भ करते हुये उपस्थित समस्त क्षत्रिय बंधुओं, युवाओं द्वारा महारानी लक्ष्मीबाई के चित्र पर माल्यार्पण करते हुये उनका नमन एवं बंदन किया गया। इसके बाद प्रमुख लोगों द्वारा उनके व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर चर्चा की गई। विचारों की श्रृंखला में रमजोर सिंह चंदेल ने उनके मनु से महारानी लक्ष्मीबाई झांसी बनने तक के वृतान्त को विस्तार रूप से बताया कि किस प्रकार से उन्होने अपनी बाल्यावस्था से लेकर अन्तिम समय तक अपनी मातृभूमि के लिये संघर्ष करते हुये बीरगति को प्राप्त हुई थी। विवेक सिंह कछवाह ने बताया कि महारानी लक्ष्मी बाई संसार के महान योद्धाओं में एक थी और उन्हे अपनी मातृभूमि भारत भूमि प्राणों से अधिक प्रिय थी। यही कारण रहा कि उन्होने अंग्रेजों द्वारा दिये गये तमाम प्रलोभनों को ठुकराकर बीरांगना की तरह युद्ध का वरण किया। श्याम सिंह ने कहा कि महारानी लक्ष्मीबाई हमारे देश, विशेष कर बुन्देलखण्ड की एक महान बीरांगना थी, उनके अन्दर रणभूमि में सेना का नेतृत्व करने की विलक्षण प्रतिभा थी। राम सिंह कछवाह ने अपने विचार व्यक्त करते हुये कहा कि बुन्देलखण्ड को विश्व के तमाम इतिहासकार केवल महरानी लक्ष्मीबाई झांसी के कारण ह जानते है। इनके लिये जगह-जगह पर पंक्तियां सुनी व गायी जाती है। लोकेन्द्र सिंह द्वारा महारानी लक्ष्मीबाई के जीवन पर प्रकाश डाला गया। अन्त में सभी पदाधिकारियों द्वारा निर्णय लिया गया कि इनके अप्रतिम बलिदान को सदा याद रखने के लिये बांदा नगर के बाईपास के किसी भी चैराहे पर महारानी लक्ष्मीबाई की प्रतिमा लगवाकर उसका नामकरण महारानी लक्ष्मीबाई चैराहा किया जाये। बैठक में करूणेश सिंह कछवाह, आशीष सिंह, सोनू सिंह, पप्पू भइया, दीपक सिंह, मयंक प्रताप सिंह, बालेन्द्र सिंह, नीलाम्बर सिंह आदि क्षत्रियगण उपस्थित रहे। 

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