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जनक विलाप देख भावुक हो गए दर्शक

पनगरा गांव में आयोजित की जा रही रामलीला 

बांदा, कृपाशंकर दुबे । नरैनी कस्बे से ठीक पहले स्थित पनगरा गांव के आयुष ग्राम दिव्य चिकित्सा भवन के संस्थापक डा.मदनगोपाल बाजपेई के संयोजन में आयोजित दस दिवसीय रामलीला के चैथे दिन मप्र के रींवा खजूरीताल स्थित देश की ख्यातिलब्ध आदर्श रामलीला मंडली के कलाकारों ने जनक विलाप, धनुष भंग व परशुराम लक्ष्मण संवाद की लीला का सजीव मंचन किया, वहीं रावण वाणासुर संवाद का मंचन किया।
शुक्रवार को रामलीला के चैथे दिन रामलीला कलाकारों ने सीता स्वयंबर विफल होता देख राजा जनक अपनी आंसुओं को रोक नहीं पाए और भाव विह्वल होकर विलाप करने लगे। उन्होंने समूची धरती को वीर विहीन तक

रामलीला में राम-सीता विवाह की अद्भुत झांकी।
कह डाला। इतना सुनते ही लक्ष्मण का धैर्य टूट गया और उन्होंने भरी सभा में अपना व अपने बड़े भाई श्रीराम का परिचय बताकर इसे रघुवंशियों का अमपान करार दिया। लक्ष्मण के क्रोध से पैर पटकते ही धरती कांप उठी, जिस पर सभी राजा भयभीत हो गए। उधर गुरु विश्वामित्र के आदेश पर भगवान श्रीराम ने भगवान के शिव के धनुष को किसी पत्ते की भांति उठा लिया और प्रत्यंचा चढ़ाते समय शिव धनुष तेज आवाज के साथ टूट गया। धनुष टूटने की प्रचंड गंूज से महेंद्रांचल पवर्त पर तपस्या में लीन भगवान परशुराम का ध्यान भंग हो गया और वह क्रोध में भरे जनकपुरी आ पहुंचे। उन्होंने धनुष तोड़ने वाले को जान से मार देने का ऐलान कर दिया। जिस पर लक्ष्मण व परशुराम के बीच वीरोचित संवाद हुआ। परशुराम-लक्ष्मण संवाद को देखने के लिए विशाल जनसमूह अंतिम क्षण तक डटा रहा। वहीं परिसर में ही आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के दौरान कथावाचक पूर्व प्रचार्य माताप्रसाद शुक्ल ने वाराह अवतार व हिरणाक्ष वध की कथा सुनाई। रामलीला के दर्शकों में डा.परमानंद बाजपेई, डा.अर्चना बाजपेई, उमाचरण बाजपेई, विष्णुकांत त्रिपाठी, श्यामप्रकाश शुक्ला, राजेंद्र द्विवेदी ओरन, सीताशरण यादव, राकेश प्रताप सिंह, गिरिराज दीक्षित, शिवधनी पांडेय, प्रेमप्रकाश मिश्रा, राकेश द्विवेदी, अनंतराम त्रिपाठी, डा.अवधबिहारी द्विवेदी समेत आयुष ग्राम के तमाम लोग मौजूद रहे। 

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