Latest News

पंचदिवसीय मानस सम्मेलन का हुआ विधिवत समापन

रेलवे स्टेशन परिसर में पांच दिनों तक बही भक्ति की रसधार

बांदा, कृपाशंकर दुबे । कामतानाथ प्रमुख द्वार से पधारे संत मदन गोपाल दास महाराज ने कथा के क्रम में कहा कि हनुमान की सेवा से राम कृतार्थ हो गये थे। कामतानाथ सब नाथन के नाथ हैं मदन गोपाल दास ने व्याख्या में कहा कि किसी भी प्रकार की स्थिति परिस्थिति जो भी इस सम्मेलन में जुडी हुई है, वह कामतानाथ की कृपा से है। धर्म के प्रकाश के आलोक में संतो के मध्य समागम में उपस्थित हो पाते है।

मानस सम्मेलन में बोलते वक्ता 
मानस के उत्तरकाण्ड की चैपाई धन्य समागम कीन्ह, प्रेमपुजारी दास द्वय हंाथ से लुटाया करते थे, दरबार में पहुंचा कोई खाली हांथ नही लौटा। अन्तसचेतना में बैठा हुआ भाव हमे यहां ले आता है। रामचरित मानस पावन ग्रन्थ पर की गई टिप्पणियों की चर्चा की। हिन्दू जगत पर हो रहे अत्याचारों की व्याकुलता से व्याकुल नरहरिदास ने गोस्वामी तुलसीदास से बाबा के दशर््न कराने की प्रार्थना की। बुध विश्राम सफल जन रंजनि, रामकथा कलि कलुष विभंजन, विश्व के अनेको तीर्थो में चले जाने पर भी रामकथा का आनन्द नही मिल पायेगा। चित्रकूटधाम के कामतानाथ में प्रभु लखन समेत बसते है, आज भी बसते है। कामद में गिरि राम प्रसादा, श्रीराम की अर्हनिंश कृपा रहती है। संत मदनगोपाल दास ने कहा कि विश्राम किसे कहते है। विश्राम समाधान को कहते है। प्रतिवर्ष यह सम्मेलन पांच दिवस का सभी के मन के कलुषित विचारों को भस्मीभूत करने को होता है। अपने पांच स्थानों पर

मौजूद श्रोतागण 
आज के भ्रमण का उल्लेख कर कहा कि उन सभी पांचों स्थानों के लोग इस सम्मेलन से जुडने की बात कहते है। जगदगुरू रामानन्दाचार्य की गंभीर अस्वस्थ्ता का उल्लेख करते हुये कहा कि वह कामतानाथ के प्रतिनिधि है। मै उनका दासानुदास हूं। तुलसीदास को शतकोटि प्रणाम करते हुये कहा कि द्वापर में एक ही व्यास हुये लेकिन कलियुग में अपने जो रचना मानस के रूप में की, करोडो कष्ट की जन जन चर्चा का विषय बन गया। वाराणसी से पधारी नीलम शास्त्री ने कहा कि गिद्धराज जटायु ने श्रीराम से कहा कि मुझे अब अधिक जीने की इच्छा नही है कि राम ने कहा भगवान की कथा अमोध है, इससे जीवन धन्य हो जाता है। भांग पिलाने पर शंकर भगवान ने कहा कि गंगा क ेजल को जो पान कर लेता है, उसके जीवन में भंाग घुल जाती है। भारत में काशी की महिमा का बखान करते हुये कहा कि काशी की गलियों में घूमने वाले कहते है कि पी लो पी लो शंकर, उन्हे श्रीराम के नाम को पी लेने का जयघोष करते है। उन्होने कहा कि राम के चरणों में मन को दीवाना कर दीजिए एवं राम नाम के अमृत को पीकर मतवाला हो जाये।

No comments