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दीन को नई जिन्दगी बक्शने वाले महान संत थे बड़े पीर साहब- कारी फरीद

ग्यारहवीं शरीफ नौ दिसम्बर को 

फतेहपुर, शमशाद खान । पांचवी सदी हिजरी के सबसे बड़े वली सरकार गौसे आजम अब्दुल कादिर जीलानी बड़े पीर साहब दीनों इस्लाम के बहुत बड़े अलमबरदार और दीन को नई जिन्दगी बक्शने वाले महान संत पुरूष थे। इसलिए आज पूरी दुनिया मोहिउद्दीन जिसका अर्थ है दीन को जिन्दा करने वाला के नाम से याद करती है। 
यह बात काजी-ए-शहर मौलाना कारी फरीद उद्दीन कादरी ने कही। उन्होने कहा कि ये महीना सरकार गौसे आजम से सम्बन्धित है। इसलिए गौस पाक के मानने वालों को चाहिए कि उनकी याद में गरीबों, बेवाओं व बेसहारा लोगों की मदद करें। उनकी शिक्षाओं पर अलम करें। उन्होने अपने इल्मो फजल के माध्यम से भटकती
काजी-ए-शहर कारी फरीद उद्दीन कादरी।  
हुयी इंसानियत को राहे रास्त पर लगाया। सूफी वली के साथ-साथ वह बहुत बड़े शिक्षाविद थे। उन्होने अपने जीवन काल में अनेकों पुस्तकें लिखकर लोगों को जिहालत के अंधेरे से उजाले में लाकर खड़ा किया और कुरआन व हदीस को इस तरह आसान करके पेश किया कि आज पूरी दुनिया कुरआन व हदीस से मतलब निकालकर अपने मसाएल हल कर लेते हैं। सारी दुनिया के मुसलमानों पर येक एक बड़ा एहसान है। मौलाना कादरी ने कहा कि गौसे आजम अब्दुल कादिर जीलानी गरीबों को खाना खिलाने में बहुत खुशी महसूस करते। अगर दुनिया का सारा खजाना उन्हें अता कर दिया जाता तो वह सब गरीबों पर लुटा देते। आप हमेशा कहते कि मेरे हाथों में पैसा बिल्कुल नहीं ठहरता अगर सुबह मेरे पास हजार दिनार हो तो शाम तक मेरे पास एक न बचे। यानी सब गरीबों, मिसकीनों, बेवाओं पर खर्च हो जाते। उन्होने कहा कि गौसे आजम ने नाजुक से नाजुह हालात में भी नमाज व रोजे की पाबंदी की है। लिहाजा उनके मानने वालों व गौस का दामन नहीं छोड़ेंगे कहने वालों को चाहिए कि सच्ची पैरवी यही है कि नमाज की पाबंदी हर कीमत पर करें क्योंकि उनकी शिक्षा पर चलकर ही दुनिया व आखिरत में कामयाबी हासिल की जा सकती है। काजी-ए-शहर ने बताया कि ग्यारहवीं शरीफ नौ दिसम्बर को मनाई जायेगी। 

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