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Tuesday, November 26, 2019

संविधान के मौलिक अधिकारों की शिविर में दी गईं जानकारी

जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ने संविधन दिवस पर आयोजित किया शिविर

बांदा, कृपाशंकर दुबे । जिला विधिक सेवा प्राधिकरण बांदा के तत्वाधान में जिला जज राधेश्याम यादव के निर्देशानुसार कृष्ण यादव नोडल अधिकारी व अपर जिला जज की अध्यक्षता में तथा भारतेन्दु प्रकाश गुप्ता, प्रभारी सचिव की उपस्थिति में एकलव्य विधि महाविद्यालय दुरेडी में 70वें संविधान दिवस का आयोजन किया गया। जिसमें छात्र-छात्राओं सहित उपस्थित लोगों को संविधान द्वारा दिये गये मौलिक अधिकारों की जानकारी दी गई।
कार्यक्रम में सबसे पहले भारतेन्दु प्रकाश गुप्ता, प्रभारी सचिव व सिविल जज सीनियर डिजीवन द्वारा बताया गया कि भारत का संविधान विश्व क सबसे विशालतम संविधान है। भारतीय संविधान में संघात्मक एवं एकात्मक संविधान का मिश्रण है। भारत के संविधान में मौलिक अधिकारों के सम्बंध में विस्तार से चर्चा की। मौलिक अधिकार भारतीय संविधान की आत्मा है तथा देश के प्रत्येक नागरिक को सम्मान से जीने का अधिकार प्रदान करता है। भारतीय संविधान 29 नवम्बर 1949 को अंगीकृत किया गया तथा 26 जनवरी 1950 से प्रभावी किया गया। सिविल जज अभिषेक ब्यास, सिविल जज जूनियन डिवीजन द्वारा संविधान दिवस मनाये जाने की पृष्ठभूमि

संविधान दिवस पर मौजूद बच्चे और अतिथिगण
पर प्रकाश डाला गया और इसी क्रम में संविधान दिवस की महत्त समझाते हुये आगे आने वाली पीढी को इसके गौरव से परिचित कराने की आवश्यकता पर बल दिया। अनुजा सिंह सिविल जज ने कहा कि किसी देश क संविधान उस देश की आत्मा होता है। वह देश की दशा अैर दिशा की प्रतिबिम्बत करता है। इसी आधार पर कोई देश आगे बढ़ता हुआ अपने लक्ष्यों को प्राप्त करता है। इस दौरान सुश्री शालिनी अपर सिविल जज द्वारा संविधान में उल्लिखित मूल्यों एवं आदर्शो को उपस्थित जनसमुदाय से परिचित कराते हुये आज भी प्रंसागिक करार दिया। काउन्सलर जनार्दन प्रसाद त्रिपाठभ् ने अनिवार्य शिक्षा अधिनियम के प्राविधानों का उल्लेख करते हुये शिक्षा के क्षेत्र में इसे एक क्रान्तिकारी कदम बताया। रामप्रताप गुप्ता सदस्य स्थायी लोक अदालत ने बताया कि भारतीय संविधान में महिलाओं को प्रदत्त अधिकारों का उल्लेख करते हुये मातृ शक्ति के उन्नयन का आधार बताया। स्वतंत्रता के बाद संविधान ने महिलाओं की दशा बेहतर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की है। शिविर में उपस्थित नितिन सिंह, मनीषा साहू सिविल जज व डा. एचक्यू हसन प्राचार्य एकलव्य विधि महाविद्यालय द्वारा अपने विचार व्यक्त किये गये।

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