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महाराष्ट्र के राजनीति सम्राट शरद पवार

(देवेश प्रताप सिंह राठौर)
(वरिष्ठ पत्रकार)

महाराष्ट्र में एक माह के उलट फेर राष्ट्रपति शासन फिर हटाना भाजपा की सरकार बनाना फिर बहुमत न होने के कारण सुप्रीम कोर्ट का बहुमत प्रदर्शित करना उसके बाद भाजपा के देवेन्द्र फर्नाडीज का त्यागपत्र यह सब एक माह के नाटक से चला जिसका आज उद्धव ठाकरे महागठबंधन की तरफ से मुख्यमंत्री की शपथ लेगें। वैसे एक बात है जैसे बच्चा बिगडैल जो बिगड़ जाता कहता मैं चाॅकलेट ही लूंगा, टाॅफी नहीं और अन्त में बच्चे की अपना मन मारकर इच्छा एवं जिद्द पुरी करनी पड़ती है वहीं महाराष्ट्र में शिवसेना ने प्रदर्शित किया कोई भी दल हो उन्होंने इस बात को स्पष्ट कर दिया था कि मुख्यमंत्री शिवसेना पार्टी का ही होगा ओर उद्धव ठाकरे आज शपथ लेकर उन्होंने अपनी हट मनवा ली जिसका मुख्य कारण एनसीपी एवं कांग्रेस भाजपा को अलग करना था।  उधर शरद पवार की 60 वर्षों की राजनीति में जो सुपर गेम अजीत पवार के रूप में खेला, उससे प्रधानमंत्री एवं गृहमंत्री अजीत पवार को आगे भेज कर भाजपा को समर्थन देना तथा उपमुख्यमंत्री बनने हेतु सब पहले से तय एनसीपी की तरफ से तय था और उसमें शरद पवार की प्रखर राजनीति के 60 वर्षों के अधिक का समय पूर्व अनुभव चाणक्य के तौर पर काम आया। अजीत पवार वेमन से एनसीपी से न न करते करते अन्दर पहले से हां थी जो अब सामने हा एनसीपी की तरफ हो गयी थी। जब भाजपा की सरकार बनी उस समय शरद पवार का सुपर पावर गेम अजीत पवार के रूप में इस्तेमाल किया गया। क्योंकि जब उपमुख्यमंत्री बन गये उसके बाद कितने एनसीपी के लोग अजीत पवार को मनाने गये यह सब एक सोची समझी देश के समक्ष नोटंकी दिखाने की प्रक्रिया रही। हकीकत सब अन्दर ही अन्दर एक थे। वैसे भी अजीत पवार के ऊपर धन संबंधी अनियमित्तायें बहुत है जो चल रहा जांच के दायरे में वर्ष 1964 में शरद पवार महाराष्ट्र के युवा मुख्यमंत्री बने थे यह लोग कहीं राजनीति में नहीं दूर-दूर तक थे वैसे सत्य हुआ शरद पवार जी एक अच्छे कुशल चाणक्य राजनीतिकार है जिनमें समय को कैसे अपने अनुकूल विपरीत स्थिति में किया जाए वह उनका महराष्ट्र में नमूना देश ने देख लिया है।
भाजपा को जब एनसीपी ने समर्थन दिया भाजपा भी उन समर्थन कर्ता नेताओं को भी अजीत पवार के साथ लाना होता और जिस तरफ एनसीपी कांग्रेस विधायकों को एकजुट हेतु होटलों में रखे हुये थे उन्हें भी समर्थन हेतु सभी विधायकों को एक साथ होटलों में समर्थन सिद्ध विधानसभा न कर ले होटलों में रखते पर सिर्फ एनसीपी के विधायक दल के नेता अजीत पवार के आने मात्र से पूरा एनसीपी का समर्थन समझ लिया यही चूक भाजपा से हुई जिन्हें सरकार बनाये जाने पर चाणक्य कहां गया अब असली चाणक्य शरद पवार ने अपनी भतीजे अजीत पवार के इस्तेमाल कर राजनीति में एक अपने अनुभव का लोहा मनवा दिया और उद्धव ठाकरे शिवसेना के मुख्यमंत्री बनेंगे यह लगभग तय हो गया है।
आतंकवाद पर हम कहे तो आतंकवाद भारत में फैलाने वाले तीन आतंकी सरगना मुख्य है जिसमें जैसे ए मोहम्मद का सरगना मौलाना मसूद अजहर एवं लस्कर तोयबा के चलाने वाले आतंकी सरगना आफिज मुहम्मद सईद और तीसरा आतंक सरगना हिजबुल मुजाहिद्दीन का सैयद सलालुददीन यह तीनों आतंकी पाकिस्तान में है। यह सब पूर्व में ही भारत के हाथ लग चुके परंतु उनको छोड़ना आज भारी महंगा साबित हुआ तथा भारत की गति विधियों में पूर्ण रूप से शामिल रहते है। इनका खात्मा ही शान्ति बहाली में बड़ा काम हो सकता है। परंतु आज जिस तरह काश्मीर के हालात सुधर रहे वह सब अन्य राज्यों की तरह हो जायेगा। परंतु विपक्षी दल एवं अन्य छोटे दल सब अलगाववादियों की भाषायें बोल रहे उन्हें धारा 370 , 35 ए का समर्थन करना चाहिये आज देश में आतंकवाद की देन पाकिस्तान है जो आमने सामने की लड़ाई करने में कभी जीत नहीं सकता तो उसने आतंकवादियों के आका तैयार किये जिनके आतंक कैम्प पाकिस्तान में चलते है। यही कारण है पाकिस्तान अपना आतंक इतना कश्मीर में अब नहीं कर पायेगा जितना उसने सोचा था धारा 370 हटने से वैसे आतंकवादियों का संगठन के गुर्गे पूरे भारत में उनकी मानसिकता रखने वाले कुछ लोग है जिन्हें पता नहीं चल पाता परंतु आज सरकारे आतंकवाद पर जिस सक्रीयता से कार्य कर रही है उससे स्पष्ट है आने वाले समय में आतंकी समाप्त हो जायेगे परंतु प्रश्न उठता है आखिर इतना आतंकी क्यों पनपने दिये पूर्व में सरकारों द्वारा कठोर निर्णय क्यों नहीं लिए थे। लेकिन भाजपा सरकार ने कश्मीर में पीडीपी पार्टी के साथ गठबंधन कर तीन वर्ष सरकार चलाई। यह भाजपा के ऊपर एक बहुत बड़ा दाग लग चुका है जब पीडीवी के साथ भाजपा जा सकती तो शिवसेना कांग्रेस एनसीपी के साथ क्यों नहीं उनसे लाख गुना बेहतर पार्टी है।

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