Latest News

अनुशासन, मर्यादाओं में चले देश का काम, संविधान निर्माताओं को बारंबार प्रणाम

संविधान दिवस पर सम्मान समारोह एवं कवि सम्मेलन आयोजित 

फतेहपुर, शमशाद खान । संविधान दिवस पर आयोजित सम्मान समारोह एवं कवि सम्मेलन में उपस्थित हुए कवियों ने अपनी एक से बढ़कर एक रचनाएं प्रस्तुत कीं। आयोजक गीतकार नवीन शुक्ल नवीन ने पढ़ा अनुशासन, मर्यादाओं में चले देश का काम, संविधान निर्माताओं को बारंबार प्रणाम। 
कलेक्ट्रेट परिसर स्थित गांधी मैदान में संविधान दिवस पर उत्तम सेवा संस्थान ट्रस्ट द्वारा सम्मान समारोह एवं कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। प्रथम सत्र में मुख्य अतिथि जनपद न्यायाधीश प्रमोद कुमार एवं विशिष्ट अतिथि जिलाधिकारी संजीव सिंह एवं पुलिस अधीक्षक प्रशांत वर्मा ने शिरकत की। कार्यक्रम के शुभारम्भ में राष्ट्रगान गाया गया। तत्पश्चात संविधान की प्रस्तावना पढ़ी गयी। ट्रस्ट के अध्यक्ष श्याम कुमार उत्तम, वरिष्ठ अधिवक्ता, ट्रस्ट के प्रबन्धक संदीप उत्तम एवं प्रसिद्ध आर्थो सर्जन डा0 विजय सिंह पटेल द्वारा न्याय की देवी प्रतिमा एवं अंग वस्त्र भेंटकर जनपद न्यायाधीश, जिलाधिकारी एवं पुलिस अधीक्षक का स्वागत किया गया।

सम्मेलन में अपनी रचना प्रस्तुत करते कवि।
संविधान निर्माताओं के प्रति सम्मान प्रकट करने के पावन उद्देश्य पर केन्द्रित इस कार्यक्रम में पचास वर्ष सेवा कार्य पूर्ण कर चुके अधिवक्ताओं का मुख्य अतिथि एवं विशिष्ट अतिथि द्वारा स्मृति चिन्ह, प्रशस्ति पत्र एवं अंग वस्त्र भेंटकर सम्मानित किया गया। सम्मानित अधिवक्ताओं में वरिष्ठ अधिवक्ता प्रेमदत्त तिवारी, सुरेश नारायण पाण्डेय, भूपेन्द्र सिंह, रामलाल सिंह, मो0 मोईनुद्दीन रहे। संचालन कर रहे प्रवीण श्रीवास्तव प्रसून द्वारा उत्तम सेवा संस्थान ट्रस्ट के सेवाभावी समाजसेवी कार्यों की विस्तार से जानकारी दी गयी। जनपद न्यायाधीश द्वारा अपने उद्बोधन में संविधान के विषय में विस्तृत जानकारी दी। जिलाधिकारी एवं पुलिस अधीक्षक ने सभी सभा को सम्बोधित किया। दूसरे सत्र में विराट कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। जिसमें अलग-अलग जिलों से आये कवियों ने शानदार काव्य पाठ कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। कवि धीरेन्द्र पाल ने पढ़ा बाबा साहब ने लिखा एक ऐसा संविधान सबको मिलता है यहां, एक जैसा सम्मान। नीरज पाण्डेय रायबरेली ने पढ़ा ‘‘राष्ट्रवादी किसी अनुबंध को न भूलना अमर शहीदों की पसंद को न भूलना।’’ लखनऊ से आये कवि सरसिज त्रिवेदी ने पढ़ा निगाहों से कभी खोने नहीं देते, पिता परिवार को अपने कभी रोने नहीं देते।’’इसी तरह कवि प्रवीण श्रीवास्तव प्रसून, रायबरेली के संतोष दीक्षित, गोविन्द गजब, काकोरी से आये अशोक अग्निपथी ने भी अपनी-अपनी रचनाएं प्रस्तुत कीं। अध्यक्षता कर रहे मधुसूदन दीक्षित ने पढ़ा भारती के पुत्र हम भारत हमारा राष्ट्र निज संस्कृति पे अभिमान होना चाहिए। इस मौके पर राकेश पासवान, डा0 देवेन्द्र श्रीवास्तव, राम प्रकाश मौर्या, शिवम, प्रखर श्रीवास्तव, हितेन्द्र बहादुर सिंह, राजेन्द्र सिंह, सुभाष द्विवेदी, चन्द्र आर्य, राकेश वर्मा, बार एसोसिएशन के अध्यक्ष सुशील मिश्रा, महामंत्री विजय कुमार सिंह आदि मौजूद रहे। 

No comments