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सीएम के मंशानुरूप वृहद होगा 47वां रामायण मेला: करवरिया

पूर्व सांसद ने विश्व पटल पर आयोजन कराने का किया आवाहन
महाशिवरात्रि को शुभारंभ, उद्घाटन की दी संस्तुति

चित्रकूट, सुखेन्द्र अग्रहरि। भगवान श्रीराम की तपोभूमि में देश का प्रतिष्ठित सांस्कृतिक समारोह रामायण मेले का 47वां वार्षिक महोत्सव पावन पवित्र त्योहार महाशिवरात्रि 21 फरवरी से प्रारंभ होकर 25 फरवरी तक रामायण मेला भवनम में आयोजित होगा। 
रविवार को रामायण मेला परिसर में आमसभा और सम्भ्रांत नागरिकों की बैठक में आयोजन की तिथियों, उद्घाटन के मुख्य अतिथि के नाम, महोत्सव की रूपरेखा आदि विषयों पर विचार विमर्श कर निर्णय लिया गया। अक्सर लोगों ने पूर्व में आयोजित मेलो की अपेक्षा आगामी आयोजन को अधिक भव्य रुचिकर, प्रभावकारी और उद्देश्यपरक बनाने पर बल दिया। इस अवसर पर रामायण मेले के कार्यकारी अध्यक्ष राजेश कुमार करवरिया ने आए हुए अतिथियों का आभार जताते हुए कहा कि मेला को भव्यता देने के लिए तैयारियां शुरू कर दी गई है। उन्होंने मुख्यमंत्री से भेंट कर उद्घाटन करने के लिए आमंत्रित किया है। जिस पर संस्तुति दी है। मुख्यमंत्री


रामायण मेला को वृहद और मनोहारी बनाने के लिए उत्साहित दिख रहे हैं। जिनकी मंशानुरूप वृहद बनाने की तैयारियां प्रारंभ कर दी है। इसी क्रम में मुख्यमंत्री ने प्रदेश के चुनिंदा सांस्कृतिक दलों को रामायण मेले में भेजने का आश्वासन भी दिया है। अन्य मांगों पर सकारात्मक रुख दिखाया है। कार्यकारी अध्यक्ष ने बताया कि लेोनिवि राज्य मंत्री चन्द्रिका प्रसाद उपाध्याय, गृह सचिव अवनीश अवस्थी सहित रामकथा के मूर्घन्य विद्वानों, विभागीय अधिकारियों आदि से भेंट कर समारोह में पधारने के लिए आमंत्रित किया है। पूर्व सांसद भैरों प्रसाद मिश्र ने कहा कि रामायण मेला को आकर्षक बनाने के लिए सभी का सहयोग जरूरी है। ऐसे आयोजनों से लोगों की आस्था प्रगाढ होती है। आध्यात्म को बल मिलेने के साथ ही प्राचीन भारतीय संस्कृति का ज्ञान होता है। उन्हेोंने आगामी 50वां रामायण मेला विश्व पटल पर आयोजित करने का आवाहन किया है। उन्होंने सीएम के प्रति आभार जताया है। संचालन करते हुए रामायण मेला के सचिव करुणाशंकर द्विवेदी ने कहा कि लगातार 46 वर्षों से मेले का आयोजन हो रहा है। मेला डा राममनोहर लोहिया द्वारा संकल्पित है। बीते वर्षों से मुख्यमंत्री मेला को वृहद रूप देने के लिए लगातार सहयोग कर रहे हैं। इस मौके पर अध्यक्षता करते हुए प्रमुख द्वार के महंत मदनगोपाल दास, कृष्णगोपाल दास, दिव्यजीवन दास, पंकज अग्रवाल आदि ने विचार व्यक्त किए। इस मौके पर शिवमंगल शास्त्री, राजाबाबू पाण्डेय, राजेन्द्र मोहन त्रिपाठी, मो यूनुस, कलीमुद्दीन बेग, चन्द्रशेखर मिश्रा, शैलेन्द्र करवरिया, रंगनाथ शुक्ला, रामभवन उपाध्याय, रामचरण लाल एड, जितेन्द्र गोस्वामी, सत्येन्द्र पाण्डेय, घनश्याम अवस्थी, ज्ञानचन्द्र गुप्ता, इन्द्रदत्त गर्ग, दद्दू महाराज आदि मौजूद रहे।

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