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मनाया गया परम पूज्य अघोरेश्वर भगवान राम जी का 27 महानिर्वाण दिवस

पड़ाव चंदौली, मोतीलाल गुप्ता। क्षेत्र के गंगा  तट आश्रम पूज्य मां श्री सर्वेश्वरी सेवा संघ के प्रांगण में परम पूज्य अघोरेश्वर भगवान राम जी का 27 महानिर्वाण दिवस मनाया गया जबकि सुबह से लेकर शाम तक विभिन्न प्रकार के कार्यक्रम आयोजित किए गए थे जिसमें प्रातः काल मां गंगा का पूजन एवं कलश यात्रा निकाली गई जो अघोरान्ना परो मंत्र नास्ति तत्व गुरोः परम का जाप करते हुए परम पूज्य श्री अघोरेश्वर के चरण पादुका तक पहुंचकर संपन्न हुई इसके बाद परम पूज्य श्री अघोरेश्वर महाप्रभु के शिष्य पूज्य श्री गुरु बाबा जी और पूज्य श्री अनिल बाबा जी के द्वारा हवन पूजन करने के बाद खाट वांग कपाल दिग बंधन पूजा की गई इस पूजन विधि का प्रचलन अघोर परंपरा के  शिष्यो में प्राचीन काल से रही है दिन में विशाल भंडारे का कार्यक्रम हुआ और
सायंकाल अघोरेश्वर गुरुकुल के बच्चों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम की प्रस्तुति दी इस अवसर पर गुरु बाबा ने अपने आशीर्वचन में कहा कि एक बार एक अमेरिकी साधु बाबा अघोरेश्वर से मिलने आए हुए थे वह बड़े उलझन में थे और परेशान भी बाबा अघोरेश्वर द्वारा पूछने पर उक्त साधु ने बताया कि मेरे गुरु का देहांत हो चुका है और उनके देहांत के उपरांत उसको बहुत परेशानियों का सामना करना पड़ा और उसे अपने गुरु भाइयों द्वारा भी परेशान होना पड़ा जिसके परिणाम स्वरुप उसने अपने गुरु आश्रम को छोड़ दिया वह कुछ दिनों तक इधर-उधर विभिन्ना स्थानों पर भटकता रहा वह काठमांडू गया नाथ संप्रदाय में दीक्षा प्राप्त कर ली परंतु उसके बाद भी उसे शांति और स्थिरता नहीं प्राप्त हुई बाबा अघोरेश्वर ने उसे बताया कि उसके परेशानियों का कारण यह है कि गुरु को सिर्फ शरीर रूप में देखा और अनुभव किया यदि वह श्री ईश्वरीय गुरु में उनके मूल तत्व को देख पाया होता तो उसको अनुभूति हुआ होता इस  गुरु का कभी मृत्यु नहीं होती यद्यपि उसे अनुभूति होती सदा उसके साथ हैं उसके समीप नजदीक और आसपास है आज के वर्तमान समय में बहुत से सम्प्रदाय धार्मिक संगठनों एवं आश्रमों
 
में ऐसा देखने को मिलता है कि गुरु के शरीर त्यागने के पश्चात शिष्यों में आपसी विवाद एवं झगड़े होने लगते हैं ऐसा इसलिए होता है कि ऐसे शिष्यों ने गुरु को सिर्फ शरीर रूप में देखा और अनुभव किया है और जब ऐसे शिष्यों के पास गुरु के मूल तत्व के दर्शन एवं अनुभूति का अभाव होता है तो वह उन कार्यों के तरफ अग्रसर होते हैं जिससे उन्हें  सांसारिक प्रतिष्ठा मिले और वे अपने अहंकार एवं इच्छाओं को तृप्त कर सकें शिष्यों के ऐसे व्यवहार है यह प्रदर्शित होता है कि उन्हें गुरु के मूल सार की कभी अनुभूति ही नहीं हुई और वे यह समझ ही नहीं सके गुरु बंधुत्व की भावना से कैसे रहे ऐसे व्यवहार से शिष्यों के आध्यात्मिक उन्नति की संभावना नहीं है अपितु ऐसा उन्हें सांसारिक माया एवं सपनों के संसार में उलझा कर रख देता है इसके विपरीत ऐसे शिष्य जो गुरु के मूल तत्व का दर्शन करते हैं यह गुरु का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं और गुरुद्वारा बताएं कार्यों को करते हैं बिना किसी प्रतिष्ठा या धन दौलत के लोग भाव से ग्रसित हुए ऐसे निरंतर आध्यात्मिक उन्नति होती है और भी कपालेश्वर के कृपा प्राप्त होते हैं आगे कहा कि  ईश्वरीय गुरु से ऐसी कामना और  प्रेरणा प्राप्त करने की चेष्टा करते हैं अब यह समझ सकें और अनुभव करें कि ईश्वरी गुरु का मूल तत्व   कभी मृत नहीं होता है उक्त कार्यक्रम में मुख्य रूप से आरके सिंह श्रीमती  वीणा झा डॉ आर के सिंह डॉ पी के सिंह श्री बी एन सिंह डॉ अशोक मिश्रा ओमप्रकाश सिंह सुनीता चौहान और  श्री अघोरेश्वर गुरुकुल के बच्चे एवं शिक्षक गण  इत्यादि रहे।

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