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21 शिक्षकों और छात्रों ने किया रक्तदान

कालीचरण निगम इंस्टीट्यूट आफ टेक्नोलाजी में किया गया रक्तदान का आयोजन 
कई लोगो ने जरूरत पड़ने पर लिया रक्तदान करने का संकल्प 

बांदा, कृपाशंकर दुबे । गुरुवार को कालीचरण निगम इंस्टीट्यूट आफ टेक्नालाजी में जिला चिकित्सालय और रेड क्लब ने संयुक्त रूप से रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया। इसमें काली चरण निगम इंस्टीट्यूट आफ टेक्नोलाॅजी, विद्यावती निगम मेमोरियल पब्लिक स्कूल, केसीएनआईटी कालेज आफ एजुकेशन के शिक्षकों और छात्रों ने बढ़-चढ़ कर भाग लिया। शिविर में 21 लोगों ने रक्तदान किया, तो वहीं तमाम लोग ऐसे भी थे, जिन्होंने कभी भी जरूरत पड़ने पर रक्तदान करने का संकल्प लिया।

रक्तदान करते हुए शिक्षक और छात्र 
रक्तदान शिविर का उद्घाटन काली चरण निगम इन्स्टीट्यूट आॅफ टेक्नोलाॅजी संस्थान के नियमित रक्तदानी प्रशान्त श्रीवास्तव निगम ने सर्वप्रथम रक्तदान कर की। शिविर में जिला चिकित्सालय की ओर से ब्लड कनेक्शन एवं ट्रान्सपोर्टेशन वैन की व्यवस्था की गई थी। जिसके माध्यम से रक्तदान करने वाले शिक्षक, छात्रों व शिक्षणोत्तर कर्मचारियों ने अपने रक्त का दान किया। संस्थान के डीन संजीव कुमार शुक्ल ने रक्तदान करने के बाद बताया कि हमारी संस्कृति में गुप्तदान को सबसे महान बताया गया है। लेकिन रक्तदान, गुप्तदान से भी बड़ा है। रक्तदान कोई मुश्किल काम नहीं होता, न ही इससे शरीर को कोई नुक्सान होता है और ना ही किसी प्रकार की कमजोरी आती है बल्कि निकाले गए खून की जगह कुछ दिनों के बाद नया खून बन जाता है। रक्तदान को महादान कहा गया है क्योंकि डोनेट की गयी खून की एक यूनिट से तीन लोगों की जान बचाई जा सकती है। जरूरत है इस संबंध में लोगों को जागरूक करने की और स्वयं पहल करने की ताकि स्वैच्छिक रक्तदान की प्रक्रिया को बढ़ाया जा सके और रक्त के अभाव में किसी को जीवन का दामन न छोड़ना पड़े। ब्लड बैंक के प्रभारी डा. एसके बाजपेई ने उपस्थित लोगों को रक्तदान से सम्बन्धित भ्रांतियों को दूर करते हुए बताय कि कोई भी स्वस्थ व्यक्ति जिसकी आयु 18 से 68 वर्ष के बीच हो, वजन 45 किलोग्राम से अधिक हो तथा जिसके रक्त में हिमोग्लोबिन का प्रतिशत 12 प्रतिशत से अधिक हो वह रक्तदान कर सकाता है। रक्तदान करने से हमारे शरीर में किसी प्रकार की कमजोरी नहीं आती बल्कि अधिक्तम 21 दिन में हमारा शरीर पुनः रक्त का निर्माण कर लेता, रक्तसंचार बेहतर हो जाता है और हम अपने आप को तरोजाता महसूस करते है। एक बार रक्तदान करने तीन माह (90 दिन) पश्चात हम पुनः रक्तदान कर सकते हैं। रेड क्लब की ओर से श्याम जी निगम ने बताया कि विश्व स्वास्थ्य संगठन के मानक के तहत भारत में सालाना एक करोड़ यूनिट रक्त की जरूरत है लेकिन उपलब्ध 75 लाख यूनिट ही हो पाता है। यानी करीब 25 लाख यूनिट खून के अभाव में हर साल सैंकड़ों मरीज दम तोड़ देते हैं। हम सबको रक्तदान का महत्व समझना चाहिए और ज्यादा से ज्यादा रक्तदान करना चाहिए और लोगो को भी प्रेरित करना चाहिए। इसी प्रकार अलग-अलग संस्थाओं में जाकर, उन्हीं के कैम्पस में रक्तदान शिविर लगाया जायेगा, ताकि रक्त की कमी से होने वाली परेशानियों से आम जनता बच सके। शिविर में निम्न रक्तदानियों ने रक्त दान किया - प्रशान्त श्रीवास्तव, डाॅ. प्रशांत द्विवेदी, डाॅ. पूर्णाशीर्ष रथ (निदेशक, विद्यावती निगम मेमोरियल पब्लिक स्कूल, बाँदा) यश सोनी, शुभम द्विवेदी, हर्ष द्विवेदी, कुमार प्रणव, मुकेश कुमार, ब्रजेश कुमार सिंह, मतीन खान, मु. कैफ, पंकज कुमार आदि मौजूद रहे। इस शिविर को सफल बनाने के लिये रेड क्लब की टीम के साथ-साथ काली चरण निगम इन्स्टीट्यूट आॅफ टेक्नोलाॅजी द्वारा संचालित प्रयास क्लब के प्रमुख अशोक शर्मा का सराहनीय योगदान रहा।

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