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डेंगू से तीन और मौतें, अब तक 104 लोग गंवा चुके हैं जान

कानपुर में डेंगू से तीन और मरीजों की मौत हो गई। पारा लुढ़कने के बावजूद टाइगर (एडीज) खत्म नहीं हो रहे। महामारी का रूप ले रहे डेंगू से अब तक 104 लोगों की मौत हो चुकी है और स्वास्थ्य विभाग के अफसर-कर्मचारी रविवार को अवकाश मनाते रहे। शहर में न तो कहीं एंटी लार्वा का छिड़काव हुआ और न ही स्वास्थ्य शिविर लगा।
कानपुर गौरव शुक्ला:- स्वास्थ्य विभाग डेंगू से सिर्फ तीन मौतें ही स्वीकार कर रहा है। यही कारण है कि वह इसकी भयावहता को उतनी गंभीरता से नहीं ले रहा है। डेंगू से जान गंवाने वाले छह अन्य मरीजों को रिकॉर्ड में शामिल करने के लिए स्वास्थ्य विभाग सोच रहा है। अभी उनके रिकॉर्ड देखकर यह जांच की जा रही है कि उन्हें वास्तव में डेंगू था या नहीं।
पनकी के गंगागंज निवासी बबलू के बेटे रिक्की (27) को चार दिन से बुखार आ रहा था। दो दिन पहले रात में हालत बिगड़ने पर परिजनों ने उसे उर्सला में भर्ती कराया। जांच में डेंगू होने का पता चला था। उर्सला से 16 तारीख को सुबह उसे हैलट रेफर कर दिया गया।
हैलट के मेडिसिन वार्ड में जगह न होने की वजह से परिजनों ने उसे हैलट से ले जाकर पनकी क्षेत्र के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया, जहां इलाज के दौरान रविवार सुबह उसकी मौत हो गई। इसी तरह ललौली (फतेहपुर) निवासी शिवमोहन (50) डेंगू की वजह से मल्टी ऑर्गन फेल्योर का शिकार हो गए। हैलट में इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।
बिंदकी (फतेहपुर) निवासी राजरानी (53) को बुखार आने पर गांव के डॉक्टर को दिखाने के बाद एक नर्सिंगहोम में भर्ती कराया गया, जहां जांच में डेंगू होने का पता चला। उन्हें सेप्टीसीमिया के साथ ही सांस लेने में भी तकलीफ हो रही थी। हैलट में इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। शहर के तमाम नर्सिंगहोमों में डेंगू और उस जैसे लक्षणों वाले मरीज बड़ी संख्या में भर्ती हैं, जिनमें से कई की हालत गंभीर है।
- मेडिकल कालेज और उर्सला पैथालॉजी में पता चले डेंगू रोगी - 2162
- इनमें से नगर जिले के डेंगू मरीज - 1639
- नगरीय क्षेत्र के डेंगू मरीज - 1335
- ग्रामीण क्षेत्रों के डेंगू मरीज - 145
- ऐसे मरीज, जिनके पते, मोबाइल नंबर गलत बताए गए - 159
- दूसरे जिलों से आकर जांच कराने वाले डेंगू रोगी - 527

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